'हिंदू' शब्द का सबसे पहला ऐतिहासिक उल्लेख फारसी (Persian) अभिलेखों और प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। यह किसी धार्मिक ग्रंथ का शब्द नहीं है, बल्कि एक भौगोलिक नाम था जो सिंधु नदी के आसपास के क्षेत्र और वहाँ के लोगों के लिए इस्तेमाल किया गया था।ऐतिहासिक प्रमाण और शुरुआतदशम शताब्दी ईसा पूर्व (6वीं-5वीं शताब्दी ईसा पूर्व): ईरान के सम्राट दारा प्रथम (Darius I) के पर्सपोलिस और नक्श-ए-रुस्तम के अभिलेखों (Inscriptions) में सबसे पहले 'हिन्दुश' (Hiduš) शब्द का प्रयोग मिलता है, जिससे उनका मतलब सिंधु नदी के पूर्व का क्षेत्र था।जेन्दा अवेस्ता (Zend Avesta): पारسی (Zoroastrian) धर्म के प्राचीन ग्रंथ में 'सप्त सिंधु' क्षेत्र को 'हप्त हिंदू' (Hapta Hindu) कहा गया है। फारसी भाषा में संस्कृत के 'स' अक्षर को 'ह' बोला जाता था, इसलिए 'सिंधु' से यह शब्द 'हिंदू' बन गया।अन्य महत्वपूर्ण बातेंमूल अर्थ: प्राचीन काल में यह किसी धर्म का नाम नहीं था, बल्कि सिंधु नदी के पार रहने वाले सभी भारतीयों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला भौगोलिक और सांस्कृतिक पहचान का शब्द था।अरबी और तुर्की प्रभाव: बाद में आठवीं शताब्दी और उसके आगे अरब तथा तुर्क आक्रमणकारियों एवं व्यापारियों ने इस क्षेत्र को 'अल-हिंद' और यहाँ के रहने वालों को 'हिंदू' कहना जारी रखा। हिन्दू फारसी भाषा का शब्द है जिसे ब्राह्मण ने मूलनिवासियों की बुद्धि पर काला गुलाम जैसी वैचारिकता नकली धर्म की आड़ में थोपा। अब जैसे ही ब्राह्मण के नकली धर्म की कहानियाँ समझ में आने लगीं उनका विचारिक असर बुद्धि पर महसूस होने लगा या ब्राह्मण द्वेष पैदा करके पहुंचाने लगा तो मूलनिवासियों को बुद्ध समझ आने लगे। जैसे बाबासाहेब आंबेडकर जी को ब्राह्मण ने मानसिक द्वेष पैदा करके उनके मन को द्वेष में फंसाया। चूंकि हिन्दू शब्द फारसी भाषा का शब्द है जिसमें वो हमारे लोगों को काला गुलाम इत्यादि बोल कर संबोधित करते रहे होंगे । इसी द्वेष से भरे शब्द को ब्राह्मण ने नकली धर्म के रूप में मूलनिवासियों की बुद्धि पर थोप दिया। इसी शब्द की जानकारी बाबासाहेब आंबेडकर जी को जब पता चली थी और जब किसी ब्राह्मण ने उन्हें मन से हिन्दू वाली घृणा भेजी होगी तो ही उन्होंने अपने आप को बौद्ध यानि बुद्धिमान कहलवाना पसंद किया होगा। चूंकि ऐसा अनुभव एक ब्राह्मण से मुझे भी प्राप्त हुआ। उसने द्वेष पैदा करते हुए मुझे अपने धर्म में जाने के लिए बोला।उसने जताया कि प्यार उसका धर्म है हमारा नहीं। इसके बाद से ही मुझे अहसास हुआ कि जो धर्म हमारी बुद्धि पर थोपा गया है वह साजिश है। जैसे जैसे बुद्धि को समझा, उस ब्राह्मण को उसकी नफरत वापिस की मन के बहुत से रहस्य समझ आने लगे। जो ब्राह्मण ने हमारे इतिहास से चुराए थे। इसीलिए ब्राह्मण धर्म बुद्ध को छुपाने की साजिश है। बच्चों को बचपन से जो बुद्धि पहुंचाई जाती है उनका मन उसी विचारों के आसपास बंधा रहता है बशर्ते की उन्हें बुद्ध मनोविज्ञान की सच्चाई पता ना चले। इसलिए बच्चों को बचपन से बुद्ध मनोविज्ञान से अवगत जरूर कराएं और नकली धर्म से अपने बच्चों को साफ तौर पर बचाएं। वरना नकली धर्म और ब्राह्मण आपके बच्चों का मन खा जाएगा।
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